इंजीनियरिंग के बाद MBA: सही या गलत

आज के कॉर्पोरेट समय में किसी भी जॉब प्रोफाइल में कार्यकुशलता के साथ साथ कौशल विविधता की भी भरपूर मांग है। दूसरे शब्दो में आज के समय में अपनी जगह और अहमियत बनाये रखने के लिए एक कर्मचारी को अपने विषय में पारंगत होने के साथ साथ नए कौशल भी सीखते रहता पड़ता है।

उदाहरण के तौर पर अगर एक इंजीनियर तरक्की करके प्रबंधन की भूमिका में आता है तो इस प्रबंधन की शिक्षा उसके इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम में नहीं दी जाती। उसके पाठ्यक्रम में तकनीकी ज्ञान पर ज्यादा ज़ोर दिया जाता है तो विश्लेषण के मुताबिक़ कंपनियों ने पाया कि उन्ही के इंजीनियर
कर्मचारियों को यदि वे कुछ लागत लगाकर एमबीए कराते हैं तो ये एक लागत प्रभावी कदम साबित होगा।

अगर हम इस पर विचार करें कि इंजीनियरिंग के बाद MBA एक सही निर्णय है या गलत तो इसका पूर्ण रूप से विस्तार हमने इस आलेख में किया है जिसे पढ़ने के बाद ये हम आप पर छोड़ते हैं कि आपका निश्यच क्या है।

इंजीनियरिंग के बाद MBA करने से पहले अपने आप से ये पूछना जरूरी है की आप ये क्यों करना चाहते है। प्रत्येक व्यक्ति के कारण अलग अलग हो सकते हैं। अगर आप इसे सिर्फ पैसे कमाने के लिए करना चाह रहे हैं तो शायद आपको ये निर्णय यही पर छोड़ देना चाहिए और दूसरी तरफ अगर आप इसे अपने कैरियर में तरक्की का एक जरिया देख रहे हैं तो हम कहेंगे कि आपको ये ज़रूर करना चाहिए।

एक इंजीनियरिंग की डिग्री यह सिखाती है की हम अपने ज्ञान को व्यावहारिक रूप में कैसे उपयोग कर सकते हैं और इसके विपरीत एमबीए की डिग्री, इंजीनियरिंग किये हुए लोगों का एक इंजीनियर द्वारा प्रबंधन सिखाती है।

एमबीए और इंजीनियरिंग के संयोजन से विद्यार्थी में मल्टी टास्किंग की क्षमता आती है। उदाहरण के लिए एक इंजीनियर के पास अगर प्रबंधन कौशल है तो वो कंपनी के तकनीकी विभाग में काम करने के साथ साथ उस विभाग की प्रबंधन की जिम्मेदारी भी अच्छे से संभाल सकता है जिस से उसका वेतन बढ़ने में काफी सहायता मिलती है तथा राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए भी यह काफी लाभदायक सिद्ध होता है।

अगर एमबीए की डिग्री कंपनी में 1-2 साल का तकनीकी काम का अनुभव लेने के बाद की जाये तो उस से काफी फायदा हो सकता है। इस से एक प्रबंधक के बारे में जानकारी मिलती है और पता चलता है की आपको अपने प्रबंधन काल में कौन सी गलतियाँ नहीं करनी हैं जो की शायद आपने अपने प्रबन्धक को करते देखा है। इस समय के दौरान बुनियादी कौशल को ज्यादा मज़बूत बनाया जा सकता है जिसका प्रभाव आपकी प्रबंधन शैली पर भी पड़ेगा क्योंकि एक व्यक्ति अगर खुद तकनीकी रूप से अच्छी तरह से कुशल है तो अपने अधीन काम करने वाले कर्मचारियो का भी नेतृत्व सही ढंग से कर सकता है।

मूल रूप से यह निर्णय एक निजी राय है जिसे सही या गलत नही कहा जा सकता क्योंकि इंजीनियरिंग के क्षेत्र को चुनने वाले कुछ छात्र अपने आप को केवल तकनीकी काम तक ही सीमित रखना चाहते हैं और उन्हें अपने इसी काम में ही आनंद आता है किन्तु कुछ छात्रों का उद्देश्य अपने पेशे में लगातार तरक्की करना होता है जिनके लिए इंजीनियरिंग के बाद MBA एक अच्छा विकल्प है जिसका अनुसरण करने से असीम वृद्धि के अवसर मिल सकते हैं। आपके अनुभव के साथ साथ ये अतिरिक्त कौशल दूसरों के साथ तुलना में आपको मज़बूत बनाता है।
तो जितना ज्यादा हम इस विषय में बात करेंगे उतना ही स्पष्ट रूप से समझ पाएंगे की आपके लिए दोनों विकल्पों में से कौन सा बेहतर है। इंजीनियरिंग के वह छात्र जिनका झुकाव अपने अध्ययन छेत्र में ज्यादा है उनके लिए आगे इंजीनियरिंग में ही पढ़ाई या फिर इस प्रोफ़ाइल की जॉब एक बेहतर विकल्प है और अगर उद्देश्य में जल्दी कुछ कर दिखाने की शीघ्रता तथा प्रकृति में प्रबंधन का कौशल है तो एमबीए सबसे अच्छा विकल्प है।

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