खाद्य सुरक्षा कानून

बढती हुई आबादी अपने साथ कुछ प्रतिकूल परिस्थितियां भी पैदा करती है। इन परिस्थितियों में कुपोषण और गरीबी मुख्य है। यह दोनों परिस्थितियां एक दूसरे से जुडी हुई है। गरीबी के कारण लोगों को अपर्याप्त पोषण मिलता है। इस वजह से वे अपनी पूर्ण क्षमता से कार्य नहीं कर सकते और अच्छा शिक्षण भी नहीं पा सकते। इससे गरीबी और बढती है। यह एक दुष्चक्र है जिसे देश के विकास के लिए तोडना अनिवार्य है। इसी दुष्चक्र को तोड़ने के लिए भारत सरकार ने 22 दिसंबर 2011 में  खाद्य सुरक्षा कानून का प्रस्ताव रखा था जिसे 12 सितंबर 2013 को लागू किया गया।

क्या है  खाद्य सुरक्षा कानून?
इस कानून का मुख्य उद्देश्य है हर जरुरतमंद परिवार में पर्याप्त पोषण पाने के लिए अनाज सस्ते दामो में मुहैया कराना। इस कानून को पूरे भारत में लागू किया गया है। माना जाता है कि इस कानून के मुताबिक़ भारत की 67% आबादी या 82 करोड़ लोगों को कम दामों में अनाज दिया जायेया। खाद्य सुरक्षा कानून के द्वारा लाभार्थियों को चुना जायेगा और उन्हें सार्वजनिक वितरण प्रणाली के द्वारा निम्न लिखित दामों में अनाज दिया जायेगा।

  • चावल 3 रु /किलो
  • गेहूं 2 रु /किलो
  • बाजरा 1 रु /किलो

इसके अलावा गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं और कुछ वर्गों के बच्चों को अनाज मुफ्त में दिया जाएगा।

आइए जाने खाद्य सुरक्षा कानून के बारे में विस्तृत विवरण।

  • तक़रीबन 75% ग्रामीण और 50% शहरी आबादी को हर महीने 5 किलो अनाज सस्ते दामों में मिलेगा। जो लोग अन्त्योदय योजना में शामिल है उन्हें हर महीने 35 किलो अनाज मिलना चालू रहेगा।
  • लाभार्थियों को चुनने के नियम बनाने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों को दी गई है। वे सामाजिक, आर्थिक और जाती के आधार पर जरुरी नियम बनायेंगे जिससे लाभार्थियों को चुना जायेगा।
  • 6 से 14 साल के बच्चों को घर में राशन या पका हुआ खाना दिया जाएगा।
  • गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को कम से कम 6000 रु का लाभ दिया जायेगा। शिशु और माता मृत्यु दर कम करने की ओर एक महत्त्व का कदम है।
  • केंद्र सरकार राज्य सरकारों को पर्याप्त अनाज मुहैया करने और उसे ट्रांसपोर्ट करने आर्थिक मदद करेगी। अनाज को सलामत तरीके से स्टोर करने के लिए जरुरी सुविधाएँ भी दी जायेगी।
  • राशन कार्ड में घर की सबसे बड़ी महिला को घर की मुखिया के तौर पर गिना जायेगा। इससे समाज में महिलाओं का सामाजिक स्थान बढाने में मदद मिलेगी।
  • अगर किसी भी लाभार्थी को इस कानून का लाभ मिलने में कठिनाई हो रही हो तो उसे जानने के लिए राज्य और जिले की कक्षा तक फरियाद निवारण केंद्र भी बनाये जायेंगे। लोग अपनी तकलीफें ऑनलाइन या टेलीफोन के द्वारा बता सकेंगे। हर केंद्र की जिम्मेदारी अलग से सरकारी अफसर को दी जायेगी।
  • इस कानून को लागू करते वक्त अगर किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार मालूम हुआ तो अराधि को दंड दिया जायेगा।

इस कानून के फायदे और नुकसान

  • इस कानून से गरीबों के खाने और स्वास्थ्य पर किये जाने वाले खर्च को कम किया जा सकेगा। माना जाता है कि हर साल इन गरीब परिवारों की तक़रीबन 4400 रु की बचत होगी। इस रकम का वे और अच्छे खाध्य पदार्थ खरीदने के लिए उपयोग कर सकते है।
  • सबसे बड़ा बोटल नेक है “गरीब और पिछड़े लाभार्थियों का चुनाव”। इन लाभार्थियों को चुनने के लिए जो नियम बनाए जायेंगे उन पर खास तबज्जो दी जानी चाहिए और उसका सकती से पालन करना चाहिए तो ही यह कानून सफल हो सकेगा।
  • भ्रष्टाचार एक और दूषण है जो इस कानून को सफल होने से रोक सकता है । खाद्य सामग्री का नियमों के अनुसार वितरण सरकार के लिए बड़ा सर दर्द साबित हो सकता है।
  • भारत में हर साल कई टन अनाज संग्रह की सुविधा न होने के कारण खराब हो जाता है। इस योजना में लाखों टन अनाज ट्रांसपोर्ट और संग्रह किया जायेगा। लेकिन उसके लिए सही सुविधाओं का कई जगह पर आभाव है।
  • लोगों को सस्ते दामों पर अनाज बेचने से किसानो को नुक्सान हो सकता है।
  • किसी भी देश के लिए इतना भारी बोझा लंबे समय तक ढोना एक कठिन कार्य है। इस लिए इस योजना का भविष्य सोचना जरुरी है।
  • किसी भी योजना का आखिरी लक्ष्य लोगों को खुद पर निर्भर बनाना है। लेकिन यह योजना लोगों को सरकार पर निर्भर बना सकती है।

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